नगीना राय
#प्रारंभिक_जीवन
नगीना राय जी का जन्म गोपालगंज के गोपालपुर गाँव में एक साधारण किसान परिवार में श्री भूलन राय के यहाँ 21 जून 1924 को हुआ था | नेता जी की दो शादी हुई थी, पहला विवाह श्रीमती रामलाली देवी से 1943 में हुआ था, दूसरी शादी श्रीमती इन्दु देवी से 1954 में हुआ था | नेता जी के 2 पुत्र एवं 5 पुत्रिया है | प्रारंभिक शिक्षा डी.ए.बी. कॉलेज गोपालगंज से लेने के बाद स्नातक की पढाई राजेन्द्र कॉलेज, छपरा से एवं कानून की पढाई लॉ कॉलेज, पटना से पूर्ण की |
#राजनितिक_संघर्ष
नेता जी ने अपने राजनितिक कैरियर की शुरुआत छात्र राजनीती से किया | सन 1946 से सन 1948 तक जिला छात्र कांग्रेस की राजनीती किये फिर सन 1949 से सन 1950 तक बिहार प्रान्तीय छात्र कांग्रेस के महासचिव रहे | सन 1958 से सन 1964 तक जिला कांग्रेस के अद्यक्ष रहे | जब नेता जी जिला के राजनीती में सक्रिय हुए तो चुनौतियां बहुत बड़ी थी | उस समय जिले के राजनीती में बड़े बड़े नाम थे जिनकी राजनितिक पकड़ बिहार ही नहीं अपितु देश के राजनीती में भी थी | जैसे अब्दुल गफ्फूर साहब जिनके ऊपर स्वयं सुबाषचन्द्र बोस जी का हाथ था | श्री कमला नाथ तिवारी जी क्रन्तिकारी योगेन्द्र शुक्ल जी के साथी थे | श्री द्वारकानाथ तिवारी जी श्री जगजीवन राम जी के विश्वासपात्र थे | श्री विभूति मिश्रा जी मोराज जी देसाई के करीबी थे |श्री कृष्णकांत बाबू और उमा पाण्डेय जी श्री कृष्णा बाबू के प्रिय थे | ऐसे राजनितिक योद्धाओ के बीच सारण के राजनीती में लगातार 20 बर्षो तक केंद्र बिंदु बन कर रहना ये किसी चमत्कार से कम नहीं था |
नेता जी का कांग्रेस के प्रति झुकाव था | लेकिन शुरुवाती दौर में कांग्रेस से मौका न मिलने के कारण पहली बार जनता पार्टी (स्वतंत्र पार्टी) से चुनाव लड़े | स्वतंत्र पार्टी के संस्थापक उस समय के दिग्गज नेता श्री चकर्वर्ती राजगोपालचारी (गांधी जी के समधी) थे | | नेता जी कांग्रेस, भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी, दलित मजदूर किसान पार्टी, जनता दल पार्टी से जुड़े रहे और लगातार चुनाव भी जीतते रहे अर्थात नेता जी की स्वीकारता सारण की जनता के बीच में किसी दल की स्वीकारता से बढ़ कर था |
इतना व्यापक स्वीकारिता का मुख्य कारण था की भरी भरकम शरीर के वावजूद वो पैदल और साईकिल से पुरे सारण का चप्पा चप्पा घूमे थे | ज्यादातर परिवारो के दुःख, सुख के हिस्सेदार रहते थे | नेता जी जात या वर्ग विशेष के नहीं बलकी पुरे जमात के नेता थे |
#राजनितिक_उपलब्धिया
नेता जी सन 1967 से 1980 तक लगातार कुचायकोट और कटेया विधानसभा से विधायक चुने गए और बिहार बिधानसभा में कुचायकोट और कटेया का नेतृत्व किया | 1980 - 1984 गोपालगंज का संसद में प्रतिनिधित्व किया | पहली बार नेता जी स्वतंत्र पार्टी से कुचायकोट विधानसभा से चुनाव लड़े और 36352 मत पा कर विजय हुए | दूसरी बार 1969 में कुचायकोट विधानसभा से चुनाव लड़े और 27467 मत पा कर विजय हुए | तीसरी बार 1972 में कुचायकोट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और 54296 वोट पा कर विजय हुए | चौथी बार 1977 में कटेया विधानसभा से चुनाव लड़े और 39695 वोट पा कर विजय हुए |
1980 में गोपालगंज लोकसभा छेत्र से चुनाव लड़े और 1962 से लगातार जीतते आ रहे द्वारिका नाथ तिवारी जी को 63820 मतों से हराकर विजय हुए | नेता जी को 159823 मत मिले थे |
इसी दौरान बिहार स्टेट को- ऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन रहे (1784 -1978 ), अखिल भारतीय बैंकर्स फेडरेशन के वाईस चेयरमैन रहे (1978 -1980 ), बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव रहे (1978 - 1980 ), बिहार सरकार में कृषि, विधुत, पशुपालन, एवं सिचाई मंत्री रहे |
#सामाजिक_कृतियाँ
भोरे और शेर में डिग्री कॉलेज की स्थापना | सोनहुला, हजारीलाल, बलिवन सागर, एच. एस. स्कुल जादोपुर में हाई-स्कूल की स्थापना, गोपालगंज और सीवान में खादी ग्रामउद्योग की स्थापना करवाने में अहम भूमिका, गोपालगंज में खेल-कूद क्लब के स्थापना में अहम भूमिका निभाना (नेता जी फुटबॉल के अच्छे खिलाडी थे ), सरकार पर दबाव बना कर उत्तर पश्चिम बिहार में गंडक का विस्तार करवाना, गंडक के विस्तार के बाद किसानो के आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व सूधार हुआ | गंडक के आने से सिचाई की सुबिधा मिली और खेतो का पैदवार चार गुना पांच गुना बढ़ गया | फिर किसानो के पैदवार को बाजार , खाद,बीज दिलवाने के लिए गोपालगंज में बिस्कोमान भवन का निर्माण करना, नेता जी के बिहार स्टेट- कोऑपरेटिव बैंक ,चेयरमैन के कार्य-काल में कुल पूंजी बढ़ कर 32 करोड़ 60 लाख हो गया जो अपने आप में चमत्कार था, ऋणः वसूली 76 प्रतिशत हो गया | नेता जी अपने राजनितिक जीवन में सारण जिले के लगभग 23 हज़ार लोगो को अलग-अलग छेत्रो में रोजगार देने का काम किया |
#सहादत
अपने पुरे राजनितिक उतार चढ़ाव के बीच नेता जी ने गोपालगंज में अपराधिओं की जड़े नहीं जमने दी थी | नेता जी जैसे ही चुनाव हारे उसके ठीक बाद अपराधिओं ने अपनी जड़े जमानी शुरू कर दी शुरुवात G Krishaiyyen (डीएम) की हत्या से हुई और बदस्तूर आज तक जारी है | राजनितिक प्रतिद्वंदी भी नेता जी का सम्मान करते थे क्यों की नेता जी राजनीती से परे हट कर व्यक्तिगत स्तर राजनितिक प्रतिद्वन्दीओ की मदद करते थे अलग अलग तरीके से उनके आर्थिक उत्थान के लिए प्रयासरत रहते थे |
इसी क्रम में 10 अप्रैल 1991 का वो काला दिन आया जब राजनितिक स्वार्थ के कारण नेता जी का हत्या कर दिया गया | प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जो भी नाम आये वो और दुखी करने वाले थे | उन लोगो के सामाजिक, आर्थिक, राजनितिक उत्थान के लिए नेता जी परिस्थिति अनुसार हर कदम उठाये थे |
नगीना राय जी का जन्म गोपालगंज के गोपालपुर गाँव में एक साधारण किसान परिवार में श्री भूलन राय के यहाँ 21 जून 1924 को हुआ था | नेता जी की दो शादी हुई थी, पहला विवाह श्रीमती रामलाली देवी से 1943 में हुआ था, दूसरी शादी श्रीमती इन्दु देवी से 1954 में हुआ था | नेता जी के 2 पुत्र एवं 5 पुत्रिया है | प्रारंभिक शिक्षा डी.ए.बी. कॉलेज गोपालगंज से लेने के बाद स्नातक की पढाई राजेन्द्र कॉलेज, छपरा से एवं कानून की पढाई लॉ कॉलेज, पटना से पूर्ण की |
#राजनितिक_संघर्ष
नेता जी ने अपने राजनितिक कैरियर की शुरुआत छात्र राजनीती से किया | सन 1946 से सन 1948 तक जिला छात्र कांग्रेस की राजनीती किये फिर सन 1949 से सन 1950 तक बिहार प्रान्तीय छात्र कांग्रेस के महासचिव रहे | सन 1958 से सन 1964 तक जिला कांग्रेस के अद्यक्ष रहे | जब नेता जी जिला के राजनीती में सक्रिय हुए तो चुनौतियां बहुत बड़ी थी | उस समय जिले के राजनीती में बड़े बड़े नाम थे जिनकी राजनितिक पकड़ बिहार ही नहीं अपितु देश के राजनीती में भी थी | जैसे अब्दुल गफ्फूर साहब जिनके ऊपर स्वयं सुबाषचन्द्र बोस जी का हाथ था | श्री कमला नाथ तिवारी जी क्रन्तिकारी योगेन्द्र शुक्ल जी के साथी थे | श्री द्वारकानाथ तिवारी जी श्री जगजीवन राम जी के विश्वासपात्र थे | श्री विभूति मिश्रा जी मोराज जी देसाई के करीबी थे |श्री कृष्णकांत बाबू और उमा पाण्डेय जी श्री कृष्णा बाबू के प्रिय थे | ऐसे राजनितिक योद्धाओ के बीच सारण के राजनीती में लगातार 20 बर्षो तक केंद्र बिंदु बन कर रहना ये किसी चमत्कार से कम नहीं था |
नेता जी का कांग्रेस के प्रति झुकाव था | लेकिन शुरुवाती दौर में कांग्रेस से मौका न मिलने के कारण पहली बार जनता पार्टी (स्वतंत्र पार्टी) से चुनाव लड़े | स्वतंत्र पार्टी के संस्थापक उस समय के दिग्गज नेता श्री चकर्वर्ती राजगोपालचारी (गांधी जी के समधी) थे | | नेता जी कांग्रेस, भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी, दलित मजदूर किसान पार्टी, जनता दल पार्टी से जुड़े रहे और लगातार चुनाव भी जीतते रहे अर्थात नेता जी की स्वीकारता सारण की जनता के बीच में किसी दल की स्वीकारता से बढ़ कर था |
इतना व्यापक स्वीकारिता का मुख्य कारण था की भरी भरकम शरीर के वावजूद वो पैदल और साईकिल से पुरे सारण का चप्पा चप्पा घूमे थे | ज्यादातर परिवारो के दुःख, सुख के हिस्सेदार रहते थे | नेता जी जात या वर्ग विशेष के नहीं बलकी पुरे जमात के नेता थे |
#राजनितिक_उपलब्धिया
नेता जी सन 1967 से 1980 तक लगातार कुचायकोट और कटेया विधानसभा से विधायक चुने गए और बिहार बिधानसभा में कुचायकोट और कटेया का नेतृत्व किया | 1980 - 1984 गोपालगंज का संसद में प्रतिनिधित्व किया | पहली बार नेता जी स्वतंत्र पार्टी से कुचायकोट विधानसभा से चुनाव लड़े और 36352 मत पा कर विजय हुए | दूसरी बार 1969 में कुचायकोट विधानसभा से चुनाव लड़े और 27467 मत पा कर विजय हुए | तीसरी बार 1972 में कुचायकोट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और 54296 वोट पा कर विजय हुए | चौथी बार 1977 में कटेया विधानसभा से चुनाव लड़े और 39695 वोट पा कर विजय हुए |
1980 में गोपालगंज लोकसभा छेत्र से चुनाव लड़े और 1962 से लगातार जीतते आ रहे द्वारिका नाथ तिवारी जी को 63820 मतों से हराकर विजय हुए | नेता जी को 159823 मत मिले थे |
इसी दौरान बिहार स्टेट को- ऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन रहे (1784 -1978 ), अखिल भारतीय बैंकर्स फेडरेशन के वाईस चेयरमैन रहे (1978 -1980 ), बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव रहे (1978 - 1980 ), बिहार सरकार में कृषि, विधुत, पशुपालन, एवं सिचाई मंत्री रहे |
#सामाजिक_कृतियाँ
भोरे और शेर में डिग्री कॉलेज की स्थापना | सोनहुला, हजारीलाल, बलिवन सागर, एच. एस. स्कुल जादोपुर में हाई-स्कूल की स्थापना, गोपालगंज और सीवान में खादी ग्रामउद्योग की स्थापना करवाने में अहम भूमिका, गोपालगंज में खेल-कूद क्लब के स्थापना में अहम भूमिका निभाना (नेता जी फुटबॉल के अच्छे खिलाडी थे ), सरकार पर दबाव बना कर उत्तर पश्चिम बिहार में गंडक का विस्तार करवाना, गंडक के विस्तार के बाद किसानो के आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व सूधार हुआ | गंडक के आने से सिचाई की सुबिधा मिली और खेतो का पैदवार चार गुना पांच गुना बढ़ गया | फिर किसानो के पैदवार को बाजार , खाद,बीज दिलवाने के लिए गोपालगंज में बिस्कोमान भवन का निर्माण करना, नेता जी के बिहार स्टेट- कोऑपरेटिव बैंक ,चेयरमैन के कार्य-काल में कुल पूंजी बढ़ कर 32 करोड़ 60 लाख हो गया जो अपने आप में चमत्कार था, ऋणः वसूली 76 प्रतिशत हो गया | नेता जी अपने राजनितिक जीवन में सारण जिले के लगभग 23 हज़ार लोगो को अलग-अलग छेत्रो में रोजगार देने का काम किया |
#सहादत
अपने पुरे राजनितिक उतार चढ़ाव के बीच नेता जी ने गोपालगंज में अपराधिओं की जड़े नहीं जमने दी थी | नेता जी जैसे ही चुनाव हारे उसके ठीक बाद अपराधिओं ने अपनी जड़े जमानी शुरू कर दी शुरुवात G Krishaiyyen (डीएम) की हत्या से हुई और बदस्तूर आज तक जारी है | राजनितिक प्रतिद्वंदी भी नेता जी का सम्मान करते थे क्यों की नेता जी राजनीती से परे हट कर व्यक्तिगत स्तर राजनितिक प्रतिद्वन्दीओ की मदद करते थे अलग अलग तरीके से उनके आर्थिक उत्थान के लिए प्रयासरत रहते थे |
इसी क्रम में 10 अप्रैल 1991 का वो काला दिन आया जब राजनितिक स्वार्थ के कारण नेता जी का हत्या कर दिया गया | प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जो भी नाम आये वो और दुखी करने वाले थे | उन लोगो के सामाजिक, आर्थिक, राजनितिक उत्थान के लिए नेता जी परिस्थिति अनुसार हर कदम उठाये थे |

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